दिल

मेरे दिल की जगह कोई खिलौना रख दिया जाए ,
वो दिल से खेलते रहते हैं , दर्द होता है "

शनिवार, 16 मई 2015

रात भर , रात रोती रही 
कुछ पराए सपनो की मौत  पर 
सुबह उठते ही सूरज ने देखा 
अपनी छाती पीट रही हवा को 
कुछ खो गया था उसका भी 
दरख़्त उड़ जाना चाहते थे हवा के संग 
ऊब गए थे इक ही जगह खड़े हुए 
दिन भर सूरज ने भी आग ऊगली 
तंदूर सा तपाया धरती को 
लोग दौड़ते रहे अपनी परछाई के आगे पीछे 
क्रोध , हवस , घमंड , लालच के पैहरान  पहनकर 
बच्चे सीख रहे थे गलतियां करना बड़ों से 
धर्म के कुछ चौराहों को खून से रंगा जा रहा था 

वक्त देख रहा था सबको 
इक मैकदे  से बैठकर 
पी  रहा था सबकी उम्र का याम 
और सोच रहा था 
कितने डूबे हुए हैं सब गुनाहों के समंदर में 

आज रात फिर , रात भर रोती रहेगी रात 
कुछ और पराए सपनो की मौत पर  । 

बुधवार, 21 जनवरी 2015

शौकीन वक्त

रोज ,  एक दिन कम हो जाता हूँ मैं 
वक्त खीँच लेता है एक कश में 
मेरी जिंदगी का एक दिन 
जैसे सिगरेट हूँ मैं  कोई 

और सिगरेट की डिब्बी हो जिंदगी मेरी 
निरंतर पीते जा रहा है मुझको 
ये आदतसाज वक्त 
लत लग गई है जिंदगीयाँ पीने की इसको 

उसकी साँसो में चुभता भी नही 
मेरी जलती हुई उम्र का धुँआ 

कोई तो समझाए उस शौकीन वक्त को 
की ये आदत अच्छी नही है उसकी  

- शिव कुमार साहिल -

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

आईना

"इक बात बेखौफ मुझसे कहता है आईना ,
कभी आदमी अच्छे हुआ करते थे तुम भी " 

                                                          - शिव कुमार साहिल - 



सोमवार, 26 मई 2014

The Desire

तम्मना हद से गुज़र गई हैं अब 
चाँद पर बस गई हैं जाकर 
रात सितारों से 
आवाज़े दी मुझको मेरे सपनो ने ,
कुछ सपने मेरी दहलीज़  पर गिरे आकर 
टूट कर सितारों से ,

आज सुबह  चुभ  गए 
मेरे  पेरों में कुछ टूटे सपने 

घाव पेरों में लेकर निकला हूँ घर से 
इन  नमक के रास्तों पर !



शनिवार, 28 दिसंबर 2013

The Lonely Lady

असी ईशक कमाई कारदे  रहे 
असी पाई पाई मारदे  रहे 
ओना गम देन दी आदत सी 
असी गम कलावे पारदे रहे 
असी जख्म आपने तेजाब नलाए 
ओ मलहम लगोन ते डारदे रहे
कदे ओ भी दिन सी मेरे सज्जना 
सानु नाल वेख लोकी साड़दे रहे 
स्कूल , पढाईयाँ छाड़ के यारा 
असी  ईशक  पढाईयाँ पाढ़दे रहे 
असी गन्ने दे  रास माँगू 
 ईशक दी भठ्ठी उते काढ़दे रहे   


असी ईशक कमाई कारदे  रहे 
असी पाई पाई मारदे  रहे.…
                                                                                                      -शिव कुमार साहिल- 

शुक्रवार, 15 मार्च 2013

दोस्ती

जब दोस्तों ने दोस्ती निभाई 
बड़ी मुश्किल से जान बचाई 


दो दिन बस साथ निभा कर 
ताना कसे के उम्र गवाई 


जब तुम बिलकुल सच्चे हो 
क्यों देते हो अपनी सफाई 


जेब तुम्हारी खाली 'साहिल' 
कौन करेगा तेरी सुनाई 




शनिवार, 23 फ़रवरी 2013

मेरा दिल


वो मुझे छोड़ के अगर जाएगा 

मेरा दिल टूट के बिखर जाएगा 


चुबेगा पांव में टूटे कांच की तरह 

वो जिस तरफ,  जिधर जाएगा  


वेसे लग चुकी हैं ठोकर दिल को 

फिर भी लगता नही, सुधर जाएगा


पूछता हैं समंदर से 'साहिल' ,

तू  मुझे छोड़ के किधर जाएगा ?





















© शिव कुमार साहिल ©

शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

"हम ना समझ पाए निगाहों के माइने उनके !
सब समझते थे जबके बेजुबान आईने उनके !!"
















                        (ग़ज़ल)


आँख को आब समझता कब हैं
आके आँखों में ठहरता कब हैं


जिरह करता हैं वो हर वक्त मुझसे
और कहता हैं के झगड़ता कब हैं


रोज जलती हैं तन्हाई दिल में
दिल में धुँआ हैं निकलता कब हैं 


रोज मनाता हूँ के भूल जा उसको
नादान  दिल पर समझता कब हैं



©  शिव कुमार "साहिल" ©