दिल

मेरे दिल की जगह कोई खिलौना रख दिया जाए ,
वो दिल से खेलते रहते हैं , दर्द होता है "

गुरुवार, 25 जून 2015

पंजाबी गीत ( Dedicated To Babu Mann)

ਹੇ ਬਾਜ਼ ਯਹੀ ਆਖ 
ਨਾ ਕਿਸੇ ਤੋ ਭੀ ਕਾਟ 
ਕਰਾਂ ਸੋਲਾਹ ਦੁਨੀ ਆਠ 

ਮੇਂ ਹਾਂ ਬਿਗਡੇਯਾ ਜਾਟ 


ਇਕ ਬੇਬ੍ਫਾ ਚੇਹਰਾ ਜੋ 
ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਵਿਚ ਹੈ ਬਸਦਾ 
ਦਿਲ ਲਾਵੇ ਲਾਢ ਓਨੁ 
ਓ ਫੇਰ ਭੀ ਹੈ ਦਸਦਾ 
ਦਿਲ ਕਰੇ ਹੈ ਗਲਤਿਯਾੰ 
ਆਪੇ ਖਾਉ ਕਦੇ ਸਾਟ  
ਹੇ ਬਾਜ਼ ਯਹੀ ਆਖ 
ਨਾ ਕਿਸੇ ਤੋ ਭੀ ਕਾਟ 
ਕਰਾਂ ਸੋਲਾਹ ਦੁਨੀ ਆਠ 
ਮੇਂ ਹਾਂ ਬਿਗਡੇਯਾ ਜਾਟ 

ਇਕ ਦਿੱਲੀ ਦਾ ਕਨੁਨ 
ਚੂਸੀ ਜਾਵੇ ਨਿਤ ਖੂਨ 
ਡਰਦੀ ਫਿਰੇ ਹੈ ਖੇਤੁਨ 
ਸਰਕਾਰਾਂ ਛੂ  ਲੇਯਾ ਮੂਨ 
ਬਚਾ ਬਚਾ ਜਾਣੇ 
ਸਾਲ ਠਾਠਵੇਂ ਦਾ ਫਾਟ 
ਹੇ ਬਾਜ਼ ਯਹੀ ਆਖ 
ਨਾ ਕਿਸੇ ਤੋ ਭੀ ਕਾਟ 
ਕਰਾਂ ਸੋਲਾਹ ਦੁਨੀ ਆਠ 
ਮੇਂ ਹਾਂ ਬਿਗਡੇਯਾ ਜਾਟ 

ਅਜੀਜ ਜੋ ਮੇਰਾ ਸੀ 
ਰਕੀਬ ਬਣ ਗੇਯਾ ਹੈ 
ਨਾਚੀਜ ਜੇਹਾ ਬੰਦਾ ਹੁਣ 
ਕਟਿਬ ਬਣ ਗੇਯਾ ਹੈ 
ਸਰਕਾਰ ਮੰਦੇ ਯਾਰ ਚਾਲ 
ਹਾਟ ਪਿਸ਼ੇ ਹਾਟ 
ਹੇ ਬਾਜ਼ ਯਹੀ ਆਖ 
ਨਾ ਕਿਸੇ ਤੋ ਭੀ ਕਾਟ 
ਕਰਾਂ ਸੋਲਾਹ ਦੁਨੀ ਆਠ 
ਮੇਂ ਹਾਂ ਬਿਗਡੇਯਾ ਜਾਟ 


बुधवार, 3 जून 2015

तन्हाई

कैसे तन्हाई में आराम मिले 
यादें उसकी बनके मेहमान मिले 

साक़िया मय में जहर भी मिला 
मेरे गम  को थोड़ी जान मिले 

बेबफाई तेरा हुनर है , बेबफा 
इसका तुमको कोई ईनाम मिले 

मैं हिन्दू हूँ , तुम मुस्लिम हो 
रहीम मुझको तुमको राम मिले 

शुक्रवार, 22 मई 2015

छलावा

हुस्न है , अदा है , खूबसूरती का दावा भी बहुत है 

आईना देखता है उनमे इक छलावा भी बहुत है 

बरसो करते रहे दुआएं हम मिलने की उनसे

 
आज मिले वो ऐसे मिलने का पछतावा भी बहुत है 


कहूँ तो क्या कहूँ तुझसे ऐ मेरे दिले ज़हीन अब 


तेरा तो अपनों को परखने का दावा भी बहुत है 



हुस्न है , अदा है , खूबसूरती का दावा भी बहुत है


आईना देखता है उनमे इक छलावा भी बहुत है 


शनिवार, 16 मई 2015

रात भर , रात रोती रही 
कुछ पराए सपनो की मौत  पर 
सुबह उठते ही सूरज ने देखा 
अपनी छाती पीट रही हवा को 
कुछ खो गया था उसका भी 
दरख़्त उड़ जाना चाहते थे हवा के संग 
ऊब गए थे इक ही जगह खड़े हुए 
दिन भर सूरज ने भी आग ऊगली 
तंदूर सा तपाया धरती को 
लोग दौड़ते रहे अपनी परछाई के आगे पीछे 
क्रोध , हवस , घमंड , लालच के पैहरान  पहनकर 
बच्चे सीख रहे थे गलतियां करना बड़ों से 
धर्म के कुछ चौराहों को खून से रंगा जा रहा था 

वक्त देख रहा था सबको 
इक मैकदे  से बैठकर 
पी  रहा था सबकी उम्र का याम 
और सोच रहा था 
कितने डूबे हुए हैं सब गुनाहों के समंदर में 

आज रात फिर , रात भर रोती रहेगी रात 
कुछ और पराए सपनो की मौत पर  । 

बुधवार, 21 जनवरी 2015

शौकीन वक्त

रोज ,  एक दिन कम हो जाता हूँ मैं 
वक्त खीँच लेता है एक कश में 
मेरी जिंदगी का एक दिन 
जैसे सिगरेट हूँ मैं  कोई 

और सिगरेट की डिब्बी हो जिंदगी मेरी 
निरंतर पीते जा रहा है मुझको 
ये आदतसाज वक्त 
लत लग गई है जिंदगीयाँ पीने की इसको 

उसकी साँसो में चुभता भी नही 
मेरी जलती हुई उम्र का धुँआ 

कोई तो समझाए उस शौकीन वक्त को 
की ये आदत अच्छी नही है उसकी  

- शिव कुमार साहिल -

गुरुवार, 8 जनवरी 2015

आईना

"इक बात बेखौफ मुझसे कहता है आईना ,
कभी आदमी अच्छे हुआ करते थे तुम भी " 

                                                          - शिव कुमार साहिल - 



सोमवार, 26 मई 2014

The Desire

तम्मना हद से गुज़र गई हैं अब 
चाँद पर बस गई हैं जाकर 
रात सितारों से 
आवाज़े दी मुझको मेरे सपनो ने ,
कुछ सपने मेरी दहलीज़  पर गिरे आकर 
टूट कर सितारों से ,

आज सुबह  चुभ  गए 
मेरे  पेरों में कुछ टूटे सपने 

घाव पेरों में लेकर निकला हूँ घर से 
इन  नमक के रास्तों पर !



शनिवार, 28 दिसंबर 2013

The Lonely Lady

असी ईशक कमाई कारदे  रहे 
असी पाई पाई मारदे  रहे 
ओना गम देन दी आदत सी 
असी गम कलावे पारदे रहे 
असी जख्म आपने तेजाब नलाए 
ओ मलहम लगोन ते डारदे रहे
कदे ओ भी दिन सी मेरे सज्जना 
सानु नाल वेख लोकी साड़दे रहे 
स्कूल , पढाईयाँ छाड़ के यारा 
असी  ईशक  पढाईयाँ पाढ़दे रहे 
असी गन्ने दे  रास माँगू 
 ईशक दी भठ्ठी उते काढ़दे रहे   


असी ईशक कमाई कारदे  रहे 
असी पाई पाई मारदे  रहे.…
                                                                                                      -शिव कुमार साहिल-