दिल

मेरे दिल की जगह कोई खिलौना रख दिया जाए ,
वो दिल से खेलते रहते हैं , दर्द होता है "

शनिवार, 9 जनवरी 2010

अभी कल की ही तो बात हैं !!


अभी कल की ही तो बात हैं
हम साथ ही तो थे
इक ही छत के नीचे
इक ही घर में
हर साँस के सांझीदार
इक ही तो पसंद थी हमारी
मै जो सोचती थी वही तो करता था वो
मेरी हर पसंद का कीतना ख्याल था उसे
मेरे लिए क्या नहीं किया उसने
मेरी इषायों ने क्या नहीं बनाया उसे
उसे लुटेरा , अपराधी , पापी , अत्याचारी
हत्यारा तक बना डाला मैने
और एक मै थी के सदा
भर पेट खाकर भी भूखी ,
नाखुश , परेशान सी ...
जाने क्या पाना था मुझे
इस शुन्य तुल्य संसार में
जाने क्या होना था मुझे
इक इंसान से बढकर
अभी कल की ही तो बात हैं
हम साथ ही तो थे
आखिर किसी अनदेखी ताकत ने
हरा ही दिया मुझे
आईने के टूटे कांच की तरह
बस यूँ ही पल भर में
कर ही दिया जुदा हमारे रिश्ते को
हमेशा - हमेशा के लिए
पर मै तो निकल पड़ी हूँ
नए रस्ते पर
फिर से नयी शुरुयात के लिए
किसी नए घर के लिए
और वो शायद इस इंतज़ार में हैं
उसी मोड़ पर बेसहारा , बेकसूर
कि
कोई चार कंधे आकर
ले जायेंगे उसे दफ़नाने के लिए
या पवित्र आग में
जलाने के लिए
या फिर पड़ा रहने देंगे
मिट्टी के शरीर को
मिट्टी के भूखे - नंगे , कीड़े - मकोड़ों के बीच
जब तक कि जिस्म मिट्टी में घुल ना जाये ,
ओंस की बूंद की तरह सूख ना जाये
जब तक कि जिस्म अदृश्य ना हो जाये
अपनी रूह की तरह ..
मेरी तरह ......!!

हाँ अभी कल की ही तो बात हैं
हम साथ ही तो थे !!



© शिव कुमार 'साहिल' ©





सोमवार, 28 दिसंबर 2009

आदमी !!


चूल्हे ठण्डे और दरवाजों पर लगे जाले हैं
आदमी
ने भूख की खातिर आदमी काट डाले हैं

कूड़े
-कर्कट से खाकर , लाखों फुटपाथ पर सोते हैं
और सरकारें कहती हैं कि हमने हालात बदल डाले हैं

पूजा करते थे जो हाथ , तेरी मूर्त को कभी
उन्ही
हाथों ने या खुदा तेरे टुकड़े कर डाले हैं

औरतें
- औरतों से खुश , मर्द - मर्दों से
नए
कानूनों ने भी संस्कार बदल डाले हैं

जब
दे ना पाए इज्जत से दो वक्त कि रोटी
उसे
चंद एक हरामियों ने औरत के अंग बेच डाले हैं

कुर्सी
, सता , दौलत के नशे में डूबे नेतायों ने
इतिहास
से पुछो, कितने पाकिस्तान बना डाले हैं



© शिव कुमार 'साहिल' ©


शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

इक छोटी सी बात !

इक छोटी सी बात कहानी हो गई
छत अधूरी थी की रात तूफानी हो गई


दिल को छुने गयी थी निगाह लेकिन
रस्ते में ही कम्बखत जिस्मानी हो गयी


मै ही बचा ता अब तक ख़ुद से
ख़ुद से भी आज इक बेईमानी हो गई


झूठ , फरेब ,अधर्म का दौर हैं
धर्म , ईमान की बात बड़ी पुरानी हो गई


© शिव कुमार 'साहिल' ©