दिल
मेरे दिल की जगह कोई खिलौना रख दिया जाए ,
वो दिल से खेलते रहते हैं , दर्द होता है "
बुधवार, 3 जून 2015
शुक्रवार, 22 मई 2015
छलावा
हुस्न है , अदा है , खूबसूरती का दावा भी बहुत है
आईना देखता है उनमे इक छलावा भी बहुत है
बरसो करते रहे दुआएं हम मिलने की उनसे
आज मिले वो ऐसे मिलने का पछतावा भी बहुत है
कहूँ तो क्या कहूँ तुझसे ऐ मेरे दिले ज़हीन अब
तेरा तो अपनों को परखने का दावा भी बहुत है
हुस्न है , अदा है , खूबसूरती का दावा भी बहुत है
आईना देखता है उनमे इक छलावा भी बहुत है
आईना देखता है उनमे इक छलावा भी बहुत है
बरसो करते रहे दुआएं हम मिलने की उनसे
आज मिले वो ऐसे मिलने का पछतावा भी बहुत है
कहूँ तो क्या कहूँ तुझसे ऐ मेरे दिले ज़हीन अब
तेरा तो अपनों को परखने का दावा भी बहुत है
हुस्न है , अदा है , खूबसूरती का दावा भी बहुत है
आईना देखता है उनमे इक छलावा भी बहुत है
शनिवार, 16 मई 2015
रात भर , रात रोती रही
कुछ पराए सपनो की मौत पर
सुबह उठते ही सूरज ने देखा
अपनी छाती पीट रही हवा को
कुछ खो गया था उसका भी
दरख़्त उड़ जाना चाहते थे हवा के संग
ऊब गए थे इक ही जगह खड़े हुए
दिन भर सूरज ने भी आग ऊगली
तंदूर सा तपाया धरती को
लोग दौड़ते रहे अपनी परछाई के आगे पीछे
क्रोध , हवस , घमंड , लालच के पैहरान पहनकर
बच्चे सीख रहे थे गलतियां करना बड़ों से
धर्म के कुछ चौराहों को खून से रंगा जा रहा था
वक्त देख रहा था सबको
इक मैकदे से बैठकर
पी रहा था सबकी उम्र का याम
और सोच रहा था
कितने डूबे हुए हैं सब गुनाहों के समंदर में
आज रात फिर , रात भर रोती रहेगी रात
कुछ और पराए सपनो की मौत पर ।
कुछ पराए सपनो की मौत पर
सुबह उठते ही सूरज ने देखा
अपनी छाती पीट रही हवा को
कुछ खो गया था उसका भी
दरख़्त उड़ जाना चाहते थे हवा के संग
ऊब गए थे इक ही जगह खड़े हुए
दिन भर सूरज ने भी आग ऊगली
तंदूर सा तपाया धरती को
लोग दौड़ते रहे अपनी परछाई के आगे पीछे
क्रोध , हवस , घमंड , लालच के पैहरान पहनकर
बच्चे सीख रहे थे गलतियां करना बड़ों से
धर्म के कुछ चौराहों को खून से रंगा जा रहा था
वक्त देख रहा था सबको
इक मैकदे से बैठकर
पी रहा था सबकी उम्र का याम
और सोच रहा था
कितने डूबे हुए हैं सब गुनाहों के समंदर में
आज रात फिर , रात भर रोती रहेगी रात
कुछ और पराए सपनो की मौत पर ।
बुधवार, 21 जनवरी 2015
शौकीन वक्त
रोज , एक दिन कम हो जाता हूँ मैं
वक्त खीँच लेता है एक कश में
मेरी जिंदगी का एक दिन
जैसे सिगरेट हूँ मैं कोई
और सिगरेट की डिब्बी हो जिंदगी मेरी
निरंतर पीते जा रहा है मुझको
ये आदतसाज वक्त
लत लग गई है जिंदगीयाँ पीने की इसको
उसकी साँसो में चुभता भी नही
मेरी जलती हुई उम्र का धुँआ
कोई तो समझाए उस शौकीन वक्त को
की ये आदत अच्छी नही है उसकी
- शिव कुमार साहिल -

वक्त खीँच लेता है एक कश में
मेरी जिंदगी का एक दिन
जैसे सिगरेट हूँ मैं कोई
निरंतर पीते जा रहा है मुझको
ये आदतसाज वक्त
लत लग गई है जिंदगीयाँ पीने की इसको
उसकी साँसो में चुभता भी नही
मेरी जलती हुई उम्र का धुँआ
कोई तो समझाए उस शौकीन वक्त को
की ये आदत अच्छी नही है उसकी
- शिव कुमार साहिल -

गुरुवार, 8 जनवरी 2015
सोमवार, 26 मई 2014
शनिवार, 28 दिसंबर 2013
The Lonely Lady
असी ईशक कमाई कारदे रहे
असी पाई पाई मारदे रहे
ओना गम देन दी आदत सी
असी गम कलावे पारदे रहे
असी जख्म आपने तेजाब नलाए
ओ मलहम लगोन ते डारदे रहे
कदे ओ भी दिन सी मेरे सज्जना
सानु नाल वेख लोकी साड़दे रहे
स्कूल , पढाईयाँ छाड़ के यारा
असी ईशक पढाईयाँ पाढ़दे रहे
असी गन्ने दे रास माँगू
ईशक दी भठ्ठी उते काढ़दे रहे
असी ईशक कमाई कारदे रहे
असी पाई पाई मारदे रहे.…
-शिव कुमार साहिल-
असी पाई पाई मारदे रहे
ओना गम देन दी आदत सी
असी गम कलावे पारदे रहे
असी जख्म आपने तेजाब नलाए
ओ मलहम लगोन ते डारदे रहे
कदे ओ भी दिन सी मेरे सज्जना
सानु नाल वेख लोकी साड़दे रहे
स्कूल , पढाईयाँ छाड़ के यारा
असी ईशक पढाईयाँ पाढ़दे रहे
असी गन्ने दे रास माँगू
ईशक दी भठ्ठी उते काढ़दे रहे
असी ईशक कमाई कारदे रहे
असी पाई पाई मारदे रहे.…
बुधवार, 18 दिसंबर 2013
शुक्रवार, 15 मार्च 2013
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