दिल

मेरे दिल की जगह कोई खिलौना रख दिया जाए ,
वो दिल से खेलते रहते हैं , दर्द होता है "

बुधवार, 3 जून 2015

तन्हाई

कैसे तन्हाई में आराम मिले 
यादें उसकी बनके मेहमान मिले 

साक़िया मय में जहर भी मिला 
मेरे गम  को थोड़ी जान मिले 

बेबफाई तेरा हुनर है , बेबफा 
इसका तुमको कोई ईनाम मिले 

मैं हिन्दू हूँ , तुम मुस्लिम हो 
रहीम मुझको तुमको राम मिले 

1 टिप्पणी:

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