दिल

मेरे दिल की जगह कोई खिलौना रख दिया जाए ,
वो दिल से खेलते रहते हैं , दर्द होता है "

बुधवार, 28 सितंबर 2011

ग़ज़ल ( आज गम इतना बढ़ाना )







आज गम इतना बढ़ाना के जमाना याद रखे
शराब इतनी पिलाना के मयखाना याद रखे

बंद कर दो दरवाज़े हवा भी गुजर ना पाए
तन्हा इतना कर जाना के तयखाना याद रखे

खून पीकर ही प्यास बुझे तो हाज़िर हूं हजूर
खून इतना बहाना के पैमाना याद रखे

कब से दिल सुलग रहा मुझको भी आग लगा
और फिर इतना जलाना के परवाना याद रखे

मेरी दीवानगी को क्या तोहफा हैं मिला
कब्र को इतना सजाना हर दीवाना याद रखे

© शिव कुमार साहिल ©





आप जी से विनम्र निवेदन हैं के उपरोक्त ग़ज़ल को अपना आशीर्बाद दे , क्योंकि ग़ज़ल कि बारीकियों , तकनिकी पक्ष से तो मैं अभी नवाकिफ ही हूं , इसलिए आप फ़नकारो से आग्रह हे के उपरोक्त ग़ज़ल को ग़ज़ल बना दीजे और मेरा मार्गदर्शन कीजिए ! धन्यबाद !

8 टिप्‍पणियां:

दिगम्बर नासवा ने कहा…

गज़ल में भाव बहुत अच्छे हैं ... तकनिकी सेकने के लिए आप पंकज सुबीर जी के ब्लॉग पर जाएं ... उनसे बेहतर जानकारी मिलना बहुत ही मुश्किल है ... गुरु बनाएँ उन्हें अपना ...

daanish ने कहा…

प्रयास करते रहे
और आदरणीय नासवा जी के मशविरे पर
ज़रूर ध्यान दें

शारदा अरोरा ने कहा…

ग़ज़ल तो अच्छी लगी ...
मगर दर्द को न इतना बढ़ाना
के वक्त रुक जाए आदमी याद रखे

shama ने कहा…

Gazal to achhee hai...wartanee me kuchh galtiyan mehsoos hueen!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

कब से दिल सुलग रहा मुझको भी आग लगा
और फिर इतना जलाना के परवाना याद रखे


बहुत खूब ..सुन्दर गज़ल ... तकनीकि दृष्टि से मुझे ज्ञान नहीं है ..

sursingh ने कहा…

WONDERFUL....SAHIL..KEEP IT UP....U HAVE REAL TALENT.

Vivek Anjan ने कहा…

वाह मेरे दोस्त वाह वाह छा गये

बेनामी ने कहा…

La especie solo podra sobrevivir a la perdida de,